चीनी सेना में भारी बगावत, राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अब नौसेना चीफ और टॉप न्यूक्लियर साइंटिस्ट को हटाया

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चीनी सेना में भारी बगावत, राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अब नौसेना चीफ और टॉप न्यूक्लियर साइंटिस्ट को हटाया

बीजिंग। चीनी सेना में भारी बगावत का मामला सामने आया है। इसके चलते राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अब नौसेना चीफ ऑफ स्टाफ समेत अपने एक टॉप न्यूक्लियर साइंटिस्ट को उनके पद से हटा दिया है। इससे पीएलए के अन्य अधिकारियों के बीच भी हड़कंप मच गया है। चीनी सेना में टॉप अधिकारियों को हटाए जाने का सिलसिला चीन में महीनों से चल रहा है। इसके पहले भी जिनपिंग अपने कई टॉप सैन्य अधिकारियों को भ्रष्टाचारए भरोसेमंद नहीं होने और गलत आचरण समेत दूसरे आरोपों में हटा चुके हैं।
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की खबर के अनुसार राष्ट्रपति जिनपिंग ने चीनी नौसेना के चीफ ऑफ स्टाफ और परमाणु वैज्ञानिक को शीर्ष विधायिका से निकाल दिया है। सैन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई की चपेट में च्स्। के कई जनरल आ चुके हैं। अब जिनपिंग ने चीन की नौसेना के चीफ ऑफ स्टाफ वाइस एडमिरल ली हानजुन और एक वरिष्ठ परमाणु वैज्ञानिक लियू शिपेंग को देश की शीर्ष विधायिकाए नेशनल पीपुल्स कांग्रेस (NPC) से निष्कासित कर दिया है। यह कदम चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) और रक्षा उद्योग में चल रहे व्यापक अनुशासनात्मक अभियान का हिस्सा माना जा रहा है।
इसके अलावा, PLA में वैचारिक कार्यों की देखरेख करने वाले पूर्व शीर्ष जनरल मियाओ हुआ को भी केंद्रीय सैन्य आयोग (NPC) से हटा दिया गया है। यह आयोग चीन की सर्वोच्च सैन्य कमान हैए जिसका नेतृत्व राष्ट्रपति शी जिनपिंग करते हैं। छच्ब् की सदस्यता से हटाए जाने का मतलब है कि ली और लियू पर गंभीर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
60 वर्षीय ली हानजुन के बारे में सार्वजनिक जानकारी बेहद सीमित है। चीफ ऑफ स्टाफ बनने से पहले वह CMC के प्रशिक्षण और प्रशासन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर थे। उन्होंने सुधार और संगठनात्मक संरचना कार्यालय में भी एक वर्ष तक काम किया था। 2014 में उन्हें फुजियान प्रांत में नौसेना बेस का कमांडर नियुक्त किया गया था और उसी समय उन्हें वाइस एडमिरल का पद दिया गया। उन दिनों ली चीन की नेवल कमांड कॉलेज में प्रशिक्षण निदेशक थे और जल्द ही संस्थान के अध्यक्ष बने।
दूसरी ओर, लियू शिपेंग एक अत्यंत गोपनीय और रणनीतिक क्षेत्र में कार्यरत थे। उन पर जिनपिंग ने क्यों गाज गिराईए इस बारे में अभी किसी को स्पष्ट जानकारी नहीं है। वे चीन की सिविल और सैन्य परमाणु परियोजनाओं की निगरानी करने वाले चाइना नेशनल न्यूक्लियर कॉर्पोरेशन (CNNC) में डिप्टी चीफ इंजीनियर थे। साथ हीए वे गांसू स्थित CNNC के 404 बेसश् के चेयरमैन और कम्युनिस्ट पार्टी सचिव भी थे। 404 बेस, जो 1,000 वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में फैला है, 1958 में स्थापित हुआ था और यह चीन का पहला व सबसे बड़ा परमाणु अनुसंधान केंद्र है। यह केंद्र आज भी चीन की परमाणु प्रतिरोधक क्षमता और रक्षा उद्योग के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

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Author: Sulahkul

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