दिल्ली हाईकोर्ट ने उस पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (PIL) को खारिज कर दिया, जिसमें मांग की गई थी कि तिहाड़ जेल में दफन अफजल गुरु और मकबूल भट की कब्रें हटाई जाएं या कहीं और शिफ्ट की जाएं। यह याचिका विश्व वैदिक सनातन संघ ने दायर की थी। याचिकाकर्ता का कहना था कि जेल के भीतर आतंकवादियों की कब्रें रखना गलत है और इससे उनकी महिमा बढ़ती है, साथ ही यह जेल नियमों और कानून का उल्लंघन है।
कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की बेंच ने कहा कि केवल भावनाओं या इच्छाओं के आधार पर कोई आदेश नहीं दिया जा सकता। बेंच ने पूछा, “2013 में अंतिम संस्कार हुआ था, अब 12 साल बाद यह मामला क्यों उठाया जा रहा है?” कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता ने किसी पुख्ता सबूत के बिना दावा किया कि कब्रों पर “जियारत/तीर्थ” के लिए लोग आते हैं।
अफजल गुरु 2001 में हुए भारतीय संसद हमले का दोषी ठहराया गया आतंकी था। उसे जैश-ए-मोहम्मद से जोड़कर आतंकियों की मदद देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
मकबूल भट जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) का संस्थापक और कश्मीरी अलगाववादी नेता था। उसे भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने और पुलिसकर्मी की हत्या के आरोप में फांसी दी गई और तिहाड़ जेल में ही दफनाया गया।
