
अमेरिका और चीन के बीच की अदावत तो किसी से छुपी नहीं है। डोनाल्ड ट्रंप भले ही जिनपिंग को भले ही पसंद करने की बात करते हो। लेकिन एक्शन उनकी बातों से बिल्कुल भी मेल नहीं खाते। इसलिए तो पहला कार्यकाल हो या ट्रंप 2.0 चीन के प्रति अमेरिका का सख्त रवैया बदस्तूर जारी है। टैरिफ वॉर हो या ताइवान के प्रति चीन का एग्रेसिव नेचर अमेरिका का ड्रैगन के प्रति स्टैंड एकदम साफ रहा है। अब इसी क्रम में अमेरिका ने चीन पर नया बैन लगा दिया है। लेकिन इस बार मसला खरीद.बिक्री से जुड़ा है और वो भी जमीन से जुड़ा मसला है। ट्रंप 2.0 के आने के बाद नया फैसला ये लिया गया है कि अब चीन अमेरिका में कोई खेती की जमीन नहीं खरीद सकता है। चीन इस फैसले को लेकर कह रहा है कि ये तो सीधा भेद-भाव है।
अमेरिकी कृषि विभाग ने राष्ट्रीय कृषि सुरक्षा कार्य योजना (एनपीपी) की घोषणा की है, जो एक नई पहल है जिसका उद्देश्य अमेरिकी कृषि भूमि को विदेशी प्रभावए विशेष रूप से चीन से बचाना है। रक्षा विभाग और गृह सुरक्षा विभाग सहित कई एजेंसियों के सहयोग से विकसित की गई इस योजना का उद्देश्य चिंताजनक देशों के विदेशी नागरिकों के साथ अनुबंध समाप्त करना और चीन को अमेरिकी कृषि भूमि खरीदने से रोकना है। कृषि सचिव ब्रुक रोलिंस ने वाशिंगटन डीण्सीण् में घोषणा करते हुए कहा कि अमेरिकी कृषि का उद्देश्य केवल हमारे परिवारों का पेट भरना नहीं है, बल्कि हमारे राष्ट्र की रक्षा करना भी है। रोलिंस ने कहा कि चीनी नागरिकों के पास वर्तमान में 2,65,000 एकड़ से ज़्यादा अमेरिकी ज़मीन है, जिनमें से कुछ सैन्य ठिकानों के पास स्थित है। राष्ट्रीय कृषि कानून केंद्र के अनुसारए 20 से ज़्यादा राज्यों ने विदेशी ज़मीन के स्वामित्व पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए हैं।
