
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अशोका विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद के खिलाफ मुकदमे की कार्यवाही पर रोक लगा दी। ऑपरेशन सिंदूर पर एक विवादास्पद सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर दो पुलिस मामलों का सामना कर रहे प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद के खिलाफ मुकदमा चल रहा है। न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने हरियाणा पुलिस के विशेष जांच दल (एसआईटी) को अगले आदेश तक प्रोफेसर के खिलाफ आरोप तय न करने का निर्देश दिया। सुनवाई के दौरानए हरियाणा पुलिस ने पीठ को बताया कि महमूदाबाद के खिलाफ दर्ज दो एफआईआर में से एक में क्लोजर रिपोर्ट पहले ही दाखिल की जा चुकी है। इस घटनाक्रम से प्रोफेसर पर कानूनी बोझ कम हो सकता हैए हालाँकि अदालत के आदेश के कारण दूसरे मामले की कार्यवाही अभी भी रुकी हुई है। प्रोफेसर महमूदाबाद को 18 मई को गिरफ्तार किया गया थाए क्योंकि उन्होंने 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में शुरू किए गए सैन्य अभियानए ऑपरेशन सिंदूर से संबंधित ब्रीफिंग के लिए कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह को चुनने के सरकार के फैसले पर एक पोस्ट लिखी थी। कथित तौर पर इस पोस्ट के लहजे और निहितार्थों के कारण काफी आलोचना हुईए जिसके बाद उन्हें भारतीय न्याय संहिता ;बीएनएसद्ध की कई धाराओं के तहत गिरफ्तार कर लिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने महमूदाबाद को गिरफ्तारी के तीन दिन बाद ज़मानत दे दी, कुछ शर्तों के साथ कि वह इस मामले या ऑपरेशन सिंदूर के बारे में सार्वजनिक रूप से कुछ भी न लिख या बोल सकें। उसे अपना पासपोर्ट भी जमा करना था।
