संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान और चीन को बड़ा झटका लगा है। अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) और उसके सुसाइड विंग मजीद ब्रिगेड को संयुक्त राष्ट्र की 1267 प्रतिबंध सूची में शामिल करने के पाकिस्तान-चीन के प्रयास को तकनीकी कारणों से रोक दिया। पश्चिमी शक्तियों ने इन संगठनों के अल-कायदा और ISIL से संबंध साबित करने के लिए पर्याप्त सबूतों की कमी का हवाला दिया। पाकिस्तान ने अमेरिका की हालिया सूचीबद्ध कार्रवाई से उत्साहित होकर तुरंत चीन के साथ मिलकर BLA और मजीद ब्रिगेड को सूचीबद्ध करने का प्रयास किया था। अमेरिका का यह रुख पाकिस्तान और चीन दोनों के लिए झटका साबित हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिका ने वही “तकनीकी रोक” अपनाई है, जिसका चीन अक्सर पाकिस्तान स्थित आतंकवादियों के खिलाफ भारत-अमेरिका की कार्रवाई को रोकने के लिए इस्तेमाल करता रहा है। इतिहास के दृष्टिकोण से बलूचिस्तान का क्षेत्र पहले स्वतंत्र रियासतों में शामिल था। ब्रिटिश शासन के अंत में इसे भारत, पाकिस्तान या स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में विकल्प दिया गया था। 1947 में मुस्लिम लीग और कलात रियासत के बीच समझौते के बाद बलूचिस्तान ने स्वतंत्र रहने की इच्छा जताई, लेकिन 1948 में पाकिस्तानी सेना ने पूरे बलूचिस्तान पर कब्जा कर लिया।
