संयुक्त राष्ट्र: भारत ने अपनी कूटनीतिक चाल से एक बार फिर सबको चौंका दिया। फिलिस्तीन को लेकर संयुक्त राष्ट्र महासभा में पेश एक अहम प्रस्ताव पर भारत ने समर्थन में मतदान किया, जबकि इजरायल इसका कड़ा विरोध कर रहा था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कूटनीति अब वैश्विक चर्चा का विषय बनी हुई है। दुनिया यह समझ नहीं पा रही कि जो भारत इजरायल का प्रबल समर्थक माना जाता है, वही फिलिस्तीन के अधिकारों के पक्ष में खड़ा होकर वोट कैसे कर देता है—और फिर भी दोनों देशों के साथ अपने रिश्ते संतुलित कैसे बनाए रखता है।
दरअसल, यह प्रस्ताव फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास को संयुक्त राष्ट्र के आगामी उच्च स्तरीय सत्र को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए संबोधित करने की अनुमति देने से जुड़ा है। अमेरिका ने पहले ही फिलिस्तीनी अधिकारियों को वीजा देने से इनकार कर दिया था, जिससे वे व्यक्तिगत रूप से हिस्सा नहीं ले पाए। 193 सदस्यीय महासभा में हुए मतदान में 145 देशों ने प्रस्ताव का समर्थन किया, जबकि अमेरिका और इजरायल समेत 5 देशों ने विरोध किया और 6 देश मतदान से दूर रहे। प्रस्ताव में अमेरिका द्वारा फिलिस्तीनी प्रतिनिधियों को वीजा न देने के फैसले पर खेद जताया गया। अब 23 सितंबर से शुरू होने वाले महासभा के 80वें सत्र की आम बहस में 25 सितंबर को फिलिस्तीनी राष्ट्रपति विश्व नेताओं को संबोधित करेंगे।
