फ्रांस ने मंगलवार को फिलिस्तीन को एक स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता दी। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने यह घोषणा यूएन की मिडिल ईस्ट पीस प्रोसेस मीटिंग के दौरान की। इससे पहले ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और पुर्तगाल ने भी फिलिस्तीन को राष्ट्र के रूप में मान्यता दी, जबकि इजराइल, अमेरिका और इटली ने ऐसा नहीं किया। इटली में इस फैसले के विरोध में हिंसक प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। प्रदर्शनकारी गाजा के समर्थन में युद्धविराम की मांग कर रहे हैं। मिलान के सेंट्रल ट्रेन स्टेशन में सैकड़ों प्रदर्शनकारी काले कपड़े पहनकर घुसे और पुलिस पर स्मोक बम, बोतलें और पत्थर फेंके। प्रदर्शन के दौरान स्टेशन और सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचा।
हिंसक प्रदर्शन के कारण ट्रेन सेवा बंद कर दी गई और पोर्ट भी बंद रहे। रोम और मिलान में 10 लोगों को हिरासत में लिया गया, जबकि 60 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए। नेपल्स में भी सड़क जाम और रेलवे स्टेशनों पर प्रदर्शन हुए, जहां पुलिस ने वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया। प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी का रुख साफ है, लेकिन लगातार विरोध प्रदर्शन जारी हैं। फिलिस्तीन को अब तक भारत, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, ब्रिटेन और सऊदी अरब समेत 152 देशों ने मान्यता दी है। यूनाइटेड नेशंस के कुल सदस्यों में करीब 78% ने फिलिस्तीन को मान्यता दी है।
