संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम के कारण उस पर तुरंत प्रतिबंध नहीं लगाने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया। रूस और चीन ने मिलकर ईरान के पक्ष में प्रस्ताव पेश किया था, लेकिन इसे अनुमोदन के लिए आवश्यक नौ देशों का समर्थन नहीं मिला। इससे ईरान समेत रूस और चीन को बड़ा झटका लगा। पश्चिमी देशों ने कहा है कि प्रतिबंध लागू होने से ईरान की विदेश में संपत्तियों को ज़ब्त किया जाएगा, हथियार सौदे रोके जाएंगे और बैलेस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर क़ानूनी कार्रवाई की जाएगी। इससे ईरान की लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था पर और दबाव पड़ेगा।
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने फैसले को “अन्यायपूर्ण और अवैध” बताया, लेकिन चेतावनी दी कि फिलहाल परमाणु अप्रसार संधि से हटने का कोई इरादा नहीं है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा कि यूरोपीय देश और अमेरिका ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम को गलत तरीके से पेश कर रहे हैं।
इस बीच, यूरोप और अमेरिका ने शर्तें रखीं कि ईरान को परमाणु कार्यक्रम पर सीधी बातचीत फिर से शुरू करनी होगी, परमाणु निरीक्षकों को स्थल तक पहुंच देने का रास्ता खोलना होगा और 400 किलोग्राम से अधिक उच्च संवर्धित यूरेनियम का लेखा जोखा देना होगा। ईरान और आईएईए के बीच हाल ही में मिस्र की मध्यस्थता में समझौता हुआ था, लेकिन UNSC के इस निर्णय के बाद इस सहयोग पर असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। पश्चिमी देशों का मानना है कि ईरान हथियार बनाने के लिए आवश्यक यूरेनियम संवर्धन के करीब पहुंच चुका है।
