नई दिल्ली में दो दिवसीय संयुक्त राष्ट्र सैन्य योगदानकर्ता देशों (UNTCC) के प्रमुखों का सम्मेलन शुरू हो गया है, जिसकी मेजबानी भारतीय सेना कर रही है। इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन में संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में अहम भूमिका निभाने वाले 32 देशों के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी शामिल हुए हैं। सम्मेलन का उद्देश्य भविष्य की शांति स्थापना के लिए साझा रणनीति तैयार करना और उभरते वैश्विक खतरों पर विचार-विमर्श करना है।
भारत की प्रतिबद्धता: 71 में से 51 मिशनों में भागीदारी
सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि भारत शांति स्थापना में हमेशा अग्रणी रहा है। उन्होंने बताया कि भारत ने संयुक्त राष्ट्र के 71 शांति अभियानों में से 51 अभियानों में भाग लिया है, जिनमें लगभग 3 लाख भारतीय सैनिकों—पुरुष और महिलाओं—ने योगदान दिया है।
जनरल द्विवेदी ने कहा, “भारतीय सैनिकों ने जहां अदम्य साहस और संकल्प के साथ सेवा की है, वहीं उन्होंने ऐसे अनुभव अर्जित किए हैं जो हम दुनिया के साथ साझा करने को तैयार हैं।”
‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना से जुड़ा आयोजन
सेना प्रमुख ने कहा कि नई दिल्ली में आयोजित यह सम्मेलन भारत की ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ (दुनिया एक परिवार है) की भावना का प्रतीक है। उन्होंने कहा, “भारत की मेजबानी न केवल सम्मान की बात है बल्कि यह हमारे साझा संकल्प का प्रतीक है कि हम मिलकर वैश्विक शांति को और सशक्त बनाएंगे। भारत सबका मित्र है — यही हमारे लोकाचार का आधार है।”

शांति सेना की नई दिशा — तकनीक और सहयोग
जनरल द्विवेदी ने कहा कि भविष्य की शांति सेना को केवल सशस्त्र उपस्थिति तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसे निवारक कूटनीति और स्थायी शांति स्थापना की दिशा में आगे बढ़ना होगा। उन्होंने कहा कि इसके लिए उन्नत तकनीक, तेज तैनाती क्षमता और अंतर-संचालन पर ध्यान देना आवश्यक है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि योगदान देने वाले देशों के बीच सहयोगात्मक प्रशिक्षण और साझा संसाधन प्रबंधन से ही दीर्घकालिक शांति संभव है।
“हमें एक ऐसा ढांचा तैयार करना होगा जो मजबूत भी हो और उत्तरदायी भी,” सेना प्रमुख ने कहा।
भारत करेगा अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन
सम्मेलन में भारत ने शांति अभियानों के लिए विकसित स्वदेशी उपकरणों का भी प्रदर्शन किया।
सेना प्रमुख ने कहा कि भारत अपनी इन क्षमताओं को इच्छुक साझेदार देशों के साथ साझा करने के लिए तैयार है और अन्य देशों की श्रेष्ठ प्रथाओं को अपनाने का भी स्वागत करता है।
उन्होंने सभी प्रतिनिधियों से एकजुट होकर शांति की दिशा में ठोस योगदान देने का आह्वान किया।
“आइए हम मिलकर सुनिश्चित करें कि हमारे प्रयास मानवता पर एक अमिट छाप छोड़ें,” उन्होंने कहा।
32 देशों के प्रतिनिधि शामिल
यह सम्मेलन 14 से 16 अक्टूबर 2025 तक चलेगा। इसमें अल्जीरिया, ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, भूटान, ब्राजील, फ्रांस, इथियोपिया, इटली, केन्या, नेपाल, नाइजीरिया, श्रीलंका, थाईलैंड, वियतनाम समेत 32 देशों के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी भाग ले रहे हैं।
